मानव कंकाल में लगभग 206 हड्डियाँ होती हैं जो वयस्कता तक स्थिर रहती हैं (जन्म के समय लगभग 350), और व्यक्ति के अनुसार अतिरिक्त हड्डियों की संख्या भिन्न हो सकती है। ये हड्डियाँ स्नायुबंधन, टेंडन, मांसपेशियों, प्रावरणी और उपास्थि द्वारा समर्थित और स्थिर रहती हैं, जो मिलकर मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम बनाती हैं। भ्रूण का कंकाल उपास्थि से बना होता है जिसका अस्थिभवन जन्म से पहले शुरू होता है और वयस्कता तक जारी रहता है।
कंकाल कई भूमिकाएँ निभाता है। यह शरीर का ढाँचा (कंकाल संरचना) बनाता है, जिससे मांसपेशियाँ और अन्य संरचनाएँ जुड़ती हैं, जिससे शरीर की गति संभव होती है। यह कुछ अंगों, जैसे कि पसलियों के पिंजरे में स्थित अंगों (हृदय, फेफड़े आदि) या मस्तिष्क, जो खोपड़ी की हड्डियों द्वारा सुरक्षित होता है, को सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें अस्थि मज्जा होती है और यह खनिजों का भंडार करता है।
I. सिर का कंकाल (Skeletal system of the head)
सिर के कंकाल को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है: कपाल (Cranium) और चेहरा (Face)। कपाल एक हड्डी का बक्सा है जिसमें मस्तिष्क (encephalon) रहता है, और इसे तिजोरी (vault) और आधार (base) में विभाजित किया गया है। चेहरा कपाल के आधार के अगले हिस्से से जुड़ा हड्डियों का एक द्रव्यमान है।
कपाल की हड्डियाँ (Bones of the Cranium)
कपाल आठ हड्डियों से बना है: फ्रंटल, एथमोइड, स्फेनोइड, ओसीसीपिटल (ये चार एकल हैं), और दो टेम्पोरल तथा दो पेरिएटल हड्डियाँ (ये युग्मित हैं)।
1. फ्रंटल हड्डी (Frontal Bone): यह सिर के पूर्ववर्ती (anterior) भाग में स्थित है। इसमें एक ऊर्ध्वाधर भाग (माथा) और एक क्षैतिज भाग (कक्षा-नाक संबंधी) होता है। इसकी बाहरी सतह पर ऑर्बिटो-नेज़ल क्रेस्ट होती है, जो नाक और आँखों के छिद्रों के किनारों को अलग करती है। इसकी आंतरिक सतह (Endocranial face) पर फ्रंटल क्रेस्ट और फोरामेन कैकम (foramen cæcum) स्थित होते हैं।
2. एथमोइड हड्डी (Ethmoid Bone): यह फ्रंटल हड्डी के क्षैतिज भाग के नीचे स्थित होती है। इसमें चार भाग होते हैं: एक लंबवत प्लेट (जिसमें क्रिस्टा गैली शामिल है), एक क्षैतिज प्लेट (cribriform plate) जो गंध तंत्रिकाओं के लिए छिद्रित होती है, और दो एथमोइड भूलभुलैया (labyrinths)। इन भूलभुलैयाओं में हवा से भरी कोशिकाएं और नाक के शंख (nasal conchae) होते हैं।
3. स्फेनोइड हड्डी (Sphenoid Bone): यह कपाल के आधार के मध्य में स्थित एक जटिल हड्डी है। इसमें एक शरीर (body) होता है जिसमें सेला टर्शिका (sella turcica) या पिट्यूटरी फोसा होता है। इसमें दो छोटे पंख (lesser wings), दो बड़े पंख (greater wings), और दो पेटीगोइड प्रक्रियाएं (pterygoid processes) होती हैं। बड़े पंखों में फोरामेन रोटंडम, ओवेल और स्पिनोसम जैसे महत्वपूर्ण छिद्र होते हैं।
4. टेम्पोरल हड्डी (Temporal Bone): यह कपाल के नीचे और किनारे पर स्थित होती है और इसमें सुनने का अंग होता है। इसके तीन भाग हैं: स्क्वैमस हिस्सा, टाइम्पैनिक हिस्सा, और पेट्रस हिस्सा (rocher)। पेट्रस हिस्सा एक पिरामिड के आकार का होता है जिसमें आंतरिक कान और महत्वपूर्ण तंत्रिका नलिकाएं (जैसे फेशियल कैनाल) होती हैं।
5. ओसीसीपिटल हड्डी (Occipital Bone): यह कपाल के पीछे और निचले हिस्से में स्थित होती है। इसके बीच में फोरामेन मैग्नम (foramen magnum) होता है, जो मस्तिष्क को रीढ़ की हड्डी से जोड़ता है। इसमें ओसीसीपिटल कॉन्डाइल्स (condyles) होते हैं जो गर्दन की पहली कशेरुक (Atlas) के साथ जुड़ते हैं।
6. पेरिएटल हड्डी (Parietal Bone): यह एक चौकोर सपाट हड्डी है जो कपाल की छत और पार्श्व दीवारों का निर्माण करती है। इसकी आंतरिक सतह पर मध्य मेनिन्जियल धमनी के लिए खांचे बने होते हैं।
चेहरे की हड्डियाँ (Bones of the Face)
चेहरा 13 स्थिर हड्डियों और एक गतिशील हड्डी (मैंडिबल) से बना है।
• मैक्सिला (Maxilla): यह ऊपरी जबड़े की मुख्य हड्डी है, जो मुँह की छत, आँखों के गड्ढे का फर्श और नाक की गुहा की दीवारों का हिस्सा बनाती है। इसमें मैक्सिलरी साइनस होता है।
• जाइगोमैटिक हड्डी (Zygomatic Bone): इसे गाल की हड्डी भी कहा जाता है, जो चेहरे के उभार और आँखों के गड्ढे के बाहरी किनारे का निर्माण करती है।
• मैंडिबल (Mandible): यह निचले जबड़े की हड्डी है, जिसमें एक शरीर (body) होता है जहाँ दाँत लगे होते हैं, और दो ऊर्ध्वाधर शाखाएं (rami) होती हैं जो कपाल के साथ जुड़ती हैं।
• पैलेटाइन हड्डी (Palatine Bone): यह L-आकार की हड्डी है जो कठोर तालू के पिछले हिस्से और नाक की गुहा का निर्माण करती है।
• वोमर (Vomer): यह एक पतली, लंबवत हड्डी है जो नाक के विभाजन (nasal septum) का पिछला और निचला हिस्सा बनाती है।
• हाइओयड हड्डी (Hyoid Bone): यह गर्दन में स्थित एक U-आकार की हड्डी है, जो जीभ की मांसपेशियों को सहारा देती है और किसी अन्य हड्डी से सीधे नहीं जुड़ी होती।
II. गर्दन का कंकाल: गर्दन की कशेरुक (Cervical Vertebrae)
गर्दन की रीढ़ सात कशेरुक (vertebrae) से बनी होती है। एक सामान्य कशेरुक में एक शरीर, एक कशेरुक छिद्र (vertebral foramen), और विभिन्न प्रक्रियाएं (processes) होती हैं।
1. एटलेस (Atlas – C1): यह पहली कशेरुक है, जिसका कोई शरीर नहीं होता। यह दो पार्श्व द्रव्यमानों (lateral masses) से बनी होती है जो एक रिंग की तरह जुड़े होते हैं। यह सिर के ओसीसीपिटल कॉन्डाइल्स को सहारा देती है।
2. एक्सिस (Axis – C2): यह दूसरी कशेरुक है, जिसकी विशेषता इसकी ओडोन्टॉइड प्रक्रिया (dens) है, जो एटलेस के लिए एक धुरी (pivot) के रूप में कार्य करती है, जिससे सिर घूम पाता है。
3. C7 (Vertebra prominens): यह सातवीं कशेरुक है, जिसका स्पिनस प्रोसेस (spinous process) बहुत लंबा और स्पष्ट होता है, जिसे त्वचा के ऊपर से महसूस किया जा सकता है।
III. कार्यात्मक शरीर रचना और वास्तुकला (Functional Architecture)
• कपाल की वास्तुकला: कपाल एक लोचदार संरचना है जिसे स्तंभों और मेहराबों (pillars and arches) द्वारा मजबूत किया गया है। ये संरचनाएं चबाने और बाहरी आघातों से होने वाले दबाव को कपाल के आधार की ओर संचारित करती हैं。
• फोंटानेल (Fontanelles): नवजात शिशुओं में, हड्डियों के बीच झिल्लीदार स्थान होते हैं जिन्हें फोंटानेल कहा जाता है। सबसे बड़ा पूर्ववर्ती (anterior) फोंटानेल है, जो हीरे के आकार का होता है।
• चेहरे की गुहाएं: चेहरे की हड्डियाँ कई महत्वपूर्ण गुहाओं का निर्माण करती हैं: कक्षीय गुहा (orbits) आँखों के लिए, नाक की गुहा (nasal cavities), और मौखिक गुहा (oral cavity) भोजन के लिए
I. रीढ़ की हड्डी (Vertebral Column)
रीढ़ की हड्डी धड़ के मध्य और पीछे के भाग में स्थित एक लंबी, प्रतिरोधी और लचीली छड़ी है। यह सिर को सहारा देती है और नीचे पेल्विस (pelvis) तक फैली होती है।
• कशेरुकाओं (Vertebrae) की संख्या: रीढ़ की हड्डी में कशेरुकाओं की संख्या आमतौर पर 33 से 35 के बीच स्थिर मानी जाती है: 7 ग्रीवा (cervical), 12 वक्षीय (thoracic), 5 काठ (lumbar), 5 त्रिक (sacral), और 3 से 5 अनुत्रिक (coccygeal)।
• एक कशेरुक की सामान्य विशेषताएं:
◦ कशेरुक शरीर (Vertebral Body): यह सामने का बेलनाकार भाग है जिसमें दो क्षैतिज सतहें (ऊपरी और निचली) होती हैं।
◦ कशेरुक मेहराब (Vertebral Arch): यह शरीर के पीछे स्थित होता है और कशेरुक छिद्र (Vertebral foramen) को घेरता है। यह आगे की तरफ पेडिकल्स (pedicles) और पीछे की तरफ लैमनी (laminae) से बना होता है।
◦ स्पाइनस प्रोसेस (Spinous process): लैमनी के मिलन बिंदु से पीछे की ओर निकलने वाला एक उभार।
◦ अनुप्रस्थ प्रक्रियाएं (Transverse processes): पेडिकल्स के पीछे से निकलने वाले दो क्षैतिज उभार।
◦ कलात्मक प्रक्रियाएं (Articular processes): चार ऊर्ध्वाधर उभार (दो ऊपरी और दो निचले) जिनके माध्यम से कशेरुक एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
• क्षेत्रीय विशेषताएं:
◦ ग्रीवा कशेरुक (Cervical vertebrae): इनका शरीर चौड़ा होता है और इनमें ट्रांसवर्सरी फोरामैन (transversary foramen) होता है जिससे कशेरुक धमनी गुजरती है।
◦ वक्षीय कशेरुक (Thoracic vertebrae): इनके शरीर में पसलियों के साथ जुड़ने के लिए कोस्टल फेसेट्स (costal facets) होते हैं। इनका स्पाइनस प्रोसेस लंबा और नीचे की ओर झुका होता है।
◦ काठ कशेरुक (Lumbar vertebrae): इनका शरीर बहुत बड़ा और गुर्दे के आकार का होता है।
• त्रिकस्थि (Sacrum) और अनुत्रिक (Coccyx):
◦ त्रिकस्थि: यह पांच त्रिक कशेरुकाओं के संलयन (fusion) से बनी एक चतुर्भुज पिरामिड जैसी हड्डी है। इसकी सामने की सतह अवतल होती है और इसमें चार जोड़े पेल्विक सैक्रल फोरामिना होते हैं।
◦ अनुत्रिक: यह चार से छह छोटी कशेरुकाओं के जुड़ने से बनी एक त्रिकोणीय हड्डी है。
II. वक्ष का कंकाल (Squelette du Thorax)
वक्षीय पिंजरा वक्षीय कशेरुकाओं, पसलियों, कोस्टल कार्टिलेज और उरोस्थि (sternum) से बना होता है।
• उरोस्थि (Sternum): यह वक्ष के सामने के मध्य भाग में स्थित एक लंबी और चपटी हड्डी है। इसके तीन मुख्य भाग हैं:
1. मैनुब्रियम (Manubrium): ऊपरी भाग जिसमें जुगुलर नॉच (jugular notch) होता है।
2. शरीर (Body): मध्य भाग जिसमें पसलियों के लिए खांचे होते हैं。
3. ज़िफ़ॉइड प्रोसेस (Xiphoid process): निचला सिरा जो अक्सर कार्टिलेज का बना होता है。
• पसलियां (Ribs): पसलियों के 12 जोड़े होते हैं। इन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया है: असली पसलियां (1-7), नकली पसलियां (8-10) और तैरती हुई पसलियां (11-12)।
◦ प्रत्येक पसली में एक सिर (head), एक गर्दन (neck), एक ट्यूबरकल (tubercle) और एक शरीर (body) होता है।
◦ पहली पसली सबसे चौड़ी और छोटी होती है。
• वक्षीय पिंजरा (Thoracic Cage): यह एक कटे हुए शंकु (cone) के आकार का होता है जिसकी आधार नीचे की ओर होती है।
III. पेल्विस का कंकाल (Squelette du Pelvis)
पेल्विस दो कूल्हे की हड्डियों (iliac bones), त्रिकस्थि और अनुत्रिक से बना एक हड्डी का घेरा है।
• विभाजन: इसे एक गोलाकार उभार (superior aperture) द्वारा दो भागों में विभाजित किया गया है: बड़ा पेल्विस (pelvis major) ऊपर और छोटा पेल्विस (pelvis minor) नीचे।
• पेल्विक ओपनिंग:
◦ ऊपरी छिद्र (Superior aperture): यह प्रोमोंटरी (promontory), इलियम की धनुषाकार रेखा और प्यूबिक सिम्फिसिस के ऊपरी किनारे से बना होता है।
◦ निचला छिद्र (Inferior aperture): यह प्यूबिक सिम्फिसिस, इस्चियोप्यूबिक शाखाओं और अनुत्रिक के सिरे द्वारा सीमित होता है।
• लिंग के अनुसार अंतर (Sexual Dimorphism):
◦ महिलाओं में: पेल्विस की दीवारें पुरुषों की तुलना में कम मोटी होती हैं, ऊपरी छिद्र अधिक चौड़ा और अंडाकार होता है, और छोटा पेल्विस अधिक विस्तृत होता है। प्यूबिक आर्च (pubic arch) पुरुषों की तुलना में अधिक खुला और चौड़ा होता है।
I. कंधे का कंकाल (Pectoral Girdle)
1. हंसली (Clavicle)
• सामान्य विवरण: यह एक लंबी हड्डी है, जो वक्ष (thorax) के अग्र-ऊपरी भाग में स्थित होती है और उरोस्थि (sternum) से लेकर एक्रोमियन तक बाहर और पीछे की ओर तिरछी दिशा में फैली होती है। यह « इटैलिक S » के आकार की होती है, जिसमें दो घुमाव होते हैं: एक आंतरिक घुमाव जो पीछे की ओर अवतल (concave) होता है और एक बाहरी जो आगे की ओर अवतल होता है। यह ऊपर से नीचे की ओर चपटी होती है।
• सतहें (Faces):
◦ ऊपरी सतह: यह लगभग पूरी तरह से चिकनी होती है, जिसमें स्टर्नो-क्लीडो-मैस्टॉइड, डेल्टोइड और ट्रेपेज़ियस मांसपेशियों के जुड़ाव के लिए कुछ खुरदरे स्थान होते हैं।
◦ निचली सतह: इसके मध्य भाग में सबक्लेवियन मांसपेशी का खांचा (groove) होता है। इसमें पोषक छिद्र (nutrient foramen), कोस्टो-क्लैविकुलर लिगामेंट का निशान और ट्रैपेज़ोइड लाइन भी स्थित होती है। ट्रैपेज़ोइड लाइन के पिछले हिस्से में कोनोइड ट्यूबरकल (conoid tubercle) होता है।
• किनारे (Borders): अग्र किनारा अंदर की ओर मोटा और उत्तल (convex) होता है (पेक्टोरलिस मेजर के लिए), जबकि बाहर की ओर पतला और अवतल होता है। पिछला किनारा अंदर की ओर अवतल और बाहर की ओर उत्तल होता है।
• सिरे (Extremities): बाहरी (एक्रोमियल) सिरा चपटा होता है और इसमें एक्रोमियन के लिए एक जोड़ सतह (articular facet) होती है। आंतरिक (स्टर्नल) सिरा सबसे बड़ा हिस्सा होता है और उरोस्थि (sternum) के साथ जुड़ता है।
2. स्कैपूला (Scapula/कंधे की हड्डी)
• सामान्य विवरण: यह एक चपटी, चौड़ी और त्रिकोणीय हड्डी है, जो वक्ष के पीछे के ऊपरी हिस्से में पहली सात पसलियों के स्तर पर स्थित होती है। इसके दो चेहरे, तीन किनारे और तीन कोण होते हैं。
• अग्र सतह (Costal face): इसे सबस्कैपुलर फोसा कहा जाता है, जिसमें सबस्कैपुलर मांसपेशी के लिए लकीरें (ridges) होती हैं। बाहरी किनारे के साथ स्कैपुलर पिलर (scapular pillar) स्थित होता है।
• पश्च सतह: यह स्कैपुलर स्पाइन द्वारा दो भागों में विभाजित होती है: ऊपर सुप्रा-स्पिनस फोसा और नीचे इन्फ्रा-स्पिनस फोसा।
◦ स्कैपुलर स्पाइन और एक्रोमियन: स्पाइन एक त्रिकोणीय हड्डी की प्लेट है जिसका बाहरी सिरा एक्रोमियन (Acromion) के रूप में विस्तारित होता है। एक्रोमियन चपटा होता है और इसके आंतरिक किनारे पर हंसली के लिए एक जोड़ सतह होती है。
• किनारे और कोण: ऊपरी किनारा छोटा और पतला होता है और इसमें स्कैपुलर नॉच होती है। आंतरिक (स्पाइनल) किनारा सबसे लंबा होता है। बाहरी (एक्सिलरी) किनारे पर इन्फ्राग्लेनॉयड ट्यूबरकल होता है। बाहरी कोण में ग्लेनॉयड कैविटी (ह्यूमरस के साथ जुड़ने के लिए), स्कैपूला की गर्दन और कोराकोइड प्रोसेस होते हैं।
◦ कोराकोइड प्रोसेस (Coracoid process): यह आधी मुड़ी हुई उंगली के आकार का होता है और स्कैपूला की गर्दन के ऊपर स्थित होता है।
II. बांह का कंकाल (Skeleton of the Arm)
ह्यूमरस (Humerus)
• सामान्य विवरण: यह बांह की लंबी हड्डी है, जो ऊपर स्कैपूला के साथ और नीचे रेडियस और अल्ना के साथ जुड़ती है।
• शरीर (Diaphysis): यह ऊपर की ओर बेलनाकार और नीचे की ओर त्रिकोणीय प्रिज्म जैसा होता है। इसकी बाहरी सतह पर V-आकार की डेल्टोइड ट्यूबरोसिटी होती है। पिछली सतह रेडियल नर्व खांचे (groove for radial nerve) द्वारा विभाजित होती है।
• ऊपरी सिरा: इसमें ह्यूमरल हेड (head) (जो एक गोले का 1/3 हिस्सा होता है), एनाटॉमिकल नेक, ग्रेटर ट्यूबरकल और लेसर ट्यूबरकल होते हैं। दोनों ट्यूबरकल के बीच बाइसपिटल खांचा (intertubercular groove) होता है।
• निचला सिरा: यह आगे-पीछे से चपटा होता है। इसमें ट्रॉक्लीया (Trochlea) और कैपिटुलम (Capitulum) नामक जोड़ सतहें होती हैं। इसके अग्र भाग में कोरोनोइड और रेडियल फोसा होते हैं, जबकि पश्च भाग में गहरा ओलेक्रानन फोसा होता है। इसके किनारों पर मेडियल एपिकॉन्डाइल और लैटरल एपिकॉन्डाइल स्थित होते हैं।
III. अग्रबाहु का कंकाल (Skeleton of the Forearm)
1. अल्ना (Ulna)
• सामान्य विवरण: यह रेडियस के अंदर की ओर स्थित एक लंबी हड्डी है。
• शरीर: यह त्रिकोणीय प्रिज्म के आकार का होता है और इसका बाहरी किनारा इंटरोसियस क्रस्ट (interosseous crest) कहलाता है।
• ऊपरी सिरा: इसमें दो बड़े उभार होते हैं: ओलेक्रानन (पीछे और ऊपर) और कोरोनोइड प्रोसेस (आगे)। ये मिलकर ट्रॉक्लियर नॉच बनाते हैं, जो ह्यूमरस के साथ जुड़ता है। कोरोनोइड प्रोसेस के बाहरी तरफ रेडियल नॉच होती है।
• निचला सिरा: इसमें अल्ना का सिर (head) और स्टाइलॉयड प्रोसेस (styloid process) होते हैं।
2. रेडियस (Radius)
• सामान्य विवरण: यह अल्ना के बाहर की ओर स्थित होती है।
• शरीर: यह अंदर और आगे की ओर अवतल घुमाव बनाती है। इसमें रेडियल पोषक छिद्र और इंटरोसियस किनारा होता है।
• ऊपरी सिरा: इसमें रेडियस का सिर (head) (बेलनाकार), गर्दन और रेडियल ट्यूबरोसिटी (बाइसेप्स के जुड़ाव के लिए) शामिल हैं।
• निचला सिरा: यह काफी बड़ा और चौकोर होता है। इसकी निचली सतह स्कैफॉइड और लुनेट हड्डियों से जुड़ती है। इसके बाहरी हिस्से में स्टाइलॉयड प्रोसेस और आंतरिक हिस्से में अल्ना के लिए अलनर नॉच होती है।
IV. हाथ का कंकाल (Skeleton of the Hand)
1. कार्पस (Carpus/कलाई)
यह आठ छोटी हड्डियों से बना होता है जो दो पंक्तियों में व्यवस्थित होती हैं:
• समीपस्थ पंक्ति (Proximal row): स्कैफॉइड (Scaphoid), लुनेट (Lunate), ट्राइक्वेट्रम (Triquetrum) और पिसिफॉर्म (Pisiform)।
• दूरस्थ पंक्ति (Distal row): ट्रैपेज़ियम (Trapezium), ट्रैपेज़ोइड (Trapezoid), कैपिटेट (Capitate) और हेमेट (Hamate)।
• हेमेट हड्डी में हुक के आकार का एक उभार होता है जिसे हैमुलस (Hamulus) कहते हैं। ये हड्डियाँ मिलकर हथेली की तरफ कार्पल टनल (carpal groove) बनाती हैं।
2. मेटाकार्पस (Metacarpus)
इसमें पाँच लंबी हड्डियाँ होती हैं जिन्हें मेटाकार्पल्स कहा जाता है। प्रत्येक मेटाकार्पल में एक शरीर, एक आधार (ऊपरी सिरा) और एक सिर (निचला सिरा) होता है। पहला मेटाकार्पल (अंगूठे का) सबसे छोटा और सबसे मोटा होता है।
3. उंगलियों की हड्डियाँ (Phalanges)
अंगूठे को छोड़कर (जिसमें दो होती हैं), प्रत्येक उंगली में तीन हड्डियाँ होती हैं: समीपस्थ (proximal), मध्य (middle) और दूरस्थ (distal) फैलेंजेस。 प्रत्येक हड्डी में एक शरीर, एक आधार और एक सिर (ट्रॉक्लीया) होता है।
4. सेसमॉइड हड्डियाँ (Sesamoid bones)
ये छोटे दाने के आकार की हड्डियाँ होती हैं, जो मुख्य रूप से हथेली की सतह पर, विशेष रूप से अंगूठे के मेटाकार्पो-फैलेंजियल जोड़ के पास स्थित होती हैं।
I. कूल्हे की हड्डी (Os Coxal/Hip Bone)
कूल्हे की हड्डी एक चपटी, चौड़ी और बहुत ही मुड़ी हुई हड्डी है, जिसकी तुलना पवनचक्की के पंखों या प्रोपेलर से की गई है। यह तीन मुख्य भागों से बनी होती है: मध्य भाग जिसमें एसिटाबुलम (acetabulum) नामक गुहा होती है; ऊपरी चौड़ा भाग जिसे इलियम का पंख (aile de l’ilium) कहते हैं; और निचला भाग जो ऑब्टुरेटर फोरामैन (foramen obturé) का घेरा बनाता है।
1. बाहरी सतह (External Face)
यह ऊपर से नीचे तीन भागों में विभाजित है:
• इलियम की ग्लूटियल सतह: यह एक त्रिकोणीय सतह है जिसे पूर्ववर्ती (anterior) और उत्तरवर्ती (posterior) ग्लूटियल रेखाएं विभाजित करती हैं। ये रेखाएं सतह को तीन क्षेत्रों में बांटती हैं जहाँ ग्लूटियल मांसपेशियां जुड़ती हैं। एसिटाबुलम के ठीक ऊपर सुप्रा-एसिटाबुलर खांच (groove) होती है।
• एसिटाबुलम (Acetabulum): यह एक गहरी जोड़ बनाने वाली गुहा है, जिसके चारों ओर एसिटाबुलर लैब्रम (bourrelet) होता है। इसमें एक गैर-जोड़ वाला केंद्रीय भाग होता है जिसे एसिटाबुलर फोसा कहते हैं और एक अर्धचंद्राकार जोड़ वाली सतह होती है।
• ऑब्टुरेटर फोरामैन: यह एक बड़ा छिद्र है जो पुरुषों में अंडाकार और महिलाओं में त्रिकोणीय होता है। इसके आगे का हिस्सा प्यूबिस और पीछे का हिस्सा इस्चियम द्वारा बनाया जाता है। इस्चियम के निचले हिस्से पर इस्चियाटिक ट्यूबरोसिटी (tubérosité ischiatique) होती है।
2. आंतरिक सतह (Internal Face)
यह सतह आर्कुएट लाइन (ligne arquée) द्वारा विभाजित होती है।
• लाइन के ऊपर: एक बड़ा और अवतल क्षेत्र होता है जिसे इलियक फोसा (fosse iliaque) कहते हैं। इसके पीछे ऑरिकुलर सतह होती है जो सैक्रम (sacrum) से जुड़ती है।
• लाइन के नीचे: यहाँ ऑब्टुरेटर फोरामैन और एसिटाबुलम के फर्श के अनुरूप एक चिकनी सतह होती है।
3. किनारे और कोण
• ऊपरी किनारा (Iliac Crest): यह ‘S’ के आकार का होता है और इसके सिरों पर पूर्ववर्ती ऊपरी इलियक स्पाइन (ASIS) और उत्तरवर्ती ऊपरी इलियक स्पाइन (PSIS) होते हैं।
• पूर्ववर्ती किनारा: इसमें ASIS, पूर्ववर्ती निचला इलियक स्पाइन (AIIS) और प्यूबिक ट्यूबरकल शामिल हैं।
• पिछला किनारा: इसमें बड़ी साइटिक नॉच (greater sciatic notch), इस्चियाटिक स्पाइन और छोटी साइटिक नॉच होती है।
II. फीमर (Femur – जांघ की हड्डी)
फीमर शरीर की सबसे लंबी हड्डी है जो ऊपर कूल्हे की हड्डी से और नीचे टिबिया से जुड़ती है।
1. शरीर (Shaft/Body)
यह त्रिकोणीय आकार का होता है और इसका पिछला किनारा बहुत उभरा हुआ और खुरदरा होता है, जिसे लिनिया एस्पेरा (linea aspera) कहा जाता है। ऊपर की ओर यह तीन शाखाओं में विभाजित होता है: ग्लूटियल ट्यूबरोसिटी, पेक्टिनियल लाइन और वास्टस मेडियुलिस की रेखा।
2. ऊपरी सिरा (Superior Extremity)
• फीमर का सिर (Head): यह एक चिकना गोलाकार हिस्सा है जो कूल्हे के जोड़ में बैठता है। इसमें फोविया कैपिटिस (fovea capitis) नामक गड्ढा होता है।
• ग्रेटर ट्रोकैन्टर (Greater Trochanter): यह बाहर की ओर एक बड़ा चतुर्भुज उभार है।
• लेसर ट्रोकैन्टर (Lesser Trochanter): यह गर्दन और शरीर के जोड़ पर स्थित एक छोटा शंक्वाकार उभार है।
• फीमर की गर्दन (Neck): यह सिर को शरीर से जोड़ती है और शरीर के साथ लगभग 130° का कोण बनाती है।
3. निचला सिरा (Inferior Extremity)
यह बहुत भारी होता है और इसमें दो कोंडाइल्स (condyles) (मध्यवर्ती और पार्श्व) होते हैं जो पीछे की ओर इंटरकोंडिलर फोसा द्वारा अलग होते हैं। इसके सामने की ओर पटेलर सतह (trochlea) होती है जहाँ घुटने की चपनी (पटेला) टिकती है।
III. पटेला (Patella – घुटने की चपनी)
यह घुटने के सामने स्थित एक त्रिकोणीय सेसामोइड हड्डी है। इसकी सामने की सतह उत्तल (convex) होती है और पिछली सतह का ऊपरी हिस्सा जोड़ बनाने वाला होता है जो फीमर से जुड़ता है।
IV. पैर की हड्डियाँ (Tibia और Fibula)
1. टिबिया (Tibia)
यह पैर के अंदर की ओर स्थित बड़ी और भारी हड्डी है।
• ऊपरी सिरा: इसमें दो कोंडाइल्स होते हैं जिनकी ऊपरी सतह पर ग्लैनोइड कैविटी होती है। इनके बीच टिबियल स्पाइन होता है। सामने की ओर टिबियल ट्यूबरोसिटी होती है।
• निचला सिरा: इसमें अंदर की ओर मीडियल मैलेलेयस (medial malleolus) नामक उभार होता है।
2. फिबुला (Fibula)
यह पैर के बाहरी हिस्से में स्थित एक पतली हड्डी है।
• ऊपरी सिरा: इसे फिबुला का सिर कहते हैं और इसमें एक एपेक्स (apex) होता है।
• निचला सिरा: यह लेटरल मैलेलेयस (lateral malleolus) बनाता है, जो पैर के टखने का बाहरी उभार है।
V. पैर का पंजा (Skeleton of the Foot)
पैर तीन समूहों में विभाजित है: टार्सस, मेटाटार्सस और फालेंजेस।
1. टार्सस (Tarsus – 7 हड्डियाँ)
• टैलस (Talus): यह टखने के जोड़ का मुख्य हिस्सा है जो ऊपर पैर की हड्डियों से और नीचे कैल्केनियस से जुड़ता है।
• कैल्केनियस (Calcaneus): यह पैर की सबसे बड़ी हड्डी है जो एड़ी बनाती है। इसमें अंदर की ओर सस्टेंटाकुलम टैली (sustentaculum tali) नामक उभार होता है।
• अन्य हड्डियाँ: इसमें क्यूबॉइड (cuboid), नेविकुलर (navicular) और तीन क्यूनीफॉर्म (cuneiform) हड्डियाँ शामिल हैं।
2. मेटाटार्सस और फालेंजेस
• मेटाटार्सल्स: ये पाँच लंबी हड्डियाँ होती हैं। पाँचवें मेटाटार्सल के आधार पर एक स्टायलोइड प्रोसेस होता है।
• फालेंजेस: पैर की उंगलियों की हड्डियाँ। अंगूठे में दो और अन्य उंगलियों में तीन फालेंजेस होते हैं।
• सेसामोइड हड्डियाँ: पहले मेटाटार्सल के नीचे दो स्थायी छोटी हड्डियाँ होती हैं।
